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बांधवगढ़ किले को वैश्विक धरोहर बनाने की पहल,राज्यसभा की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समित का सुझाव,ऐआई के जरिए वन्य जीव प्रबंधन को मजबूत बनाने हुआ बांधवगढ़ में मंथन।




भारत सरकार की पार्लियामेंट की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन स्थाई समिति ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का महत्वपूर्ण दौरा 

भारत सरकार की पार्लियामेंट की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रबंधन स्थाई समिति ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का महत्वपूर्ण दौरा किया।समिति के सभापति एवं राज्यसभा सासंद निरंजन बिशी, सदस्य गुलाम अली, तथा राज्यसभा के संयुक्त सचिव डॉ. कुशल पाठक ने 11 जनवरी को यह यात्रा संपन्न की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य बांधवगढ़ पारिस्थितिकी तंत्र के संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाने के लिए एआई-संचालित प्रेडिक्टिव मॉडल के अनुप्रयोग की जांच करना था। साथ ही, बाघों के व्यवहार और जनसंख्या गतिशीलता के अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की संभावनाओं का आकलन करना भी इस यात्रा का प्रमुख लक्ष्य था।

बांधवगढ़ किले को वैश्विक धरोहर बनाने की पहल,राज्यसभा की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समित का सुझाव,ऐआई के जरिए वन्य जीव प्रबंधन को मजबूत बनाने हुआ बांधवगढ़ में मंथन।


समिति ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्य प्राणियों एवं जैव विविधता के संरक्षण हेतु अपनाई जा रही उन्नत तकनीकों की गहन समीक्षा की। वर्तमान प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए, समिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयुक्त नवीनतम तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें भारतीय परिदृश्य में अपनाने का सुझाव दिया। यह कदम भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को विश्व स्तर पर अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बांधवगढ़ किले को वैश्विक धरोहर बनाने की पहल,राज्यसभा की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समित का सुझाव,ऐआई के जरिए वन्य जीव प्रबंधन को मजबूत बनाने हुआ बांधवगढ़ में मंथन



बांधवगढ़ की इन अभिनव पहलों ने इसे एक मॉडल टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित किया है। यहाँ अपनाई जा रही तकनीकों और रणनीतियों का अनुसरण अब देश के अन्य टाइगर रिजर्व भी कर रहे हैं। यह न केवल बाघ संरक्षण के क्षेत्र में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों में एक नया अध्याय जोड़ता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए राज्यसभा सासंदों का यह दौरा इस लिए भी खास माना जा रहा है कि समिति के सदस्यों ने पहली बार माना है कि टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित कल्चुरी कालीन किला एवं अन्य धरोहरों वैश्विक धरोहर के समान हैं और इन्हें यूनेस्को से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए ताकि इनका सरंक्षण कर आगामी पीढ़ी को एक खूबसूरत और ऐतिहासिक धरोहर को   हस्तांतरित किया जा सके।

बांधवगढ़ किले को वैश्विक धरोहर बनाने की पहल,राज्यसभा की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी समित का सुझाव,ऐआई के जरिए वन्य जीव प्रबंधन को मजबूत बनाने हुआ बांधवगढ़ में मंथन।

इस महत्वपूर्ण बैठक में आयुक्त शहडोल संभाग सुरभी गुप्ता, कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन, संसद के वरिष्ठ अधिकारी, तथा विभिन्न विभागों के राज्य एवं संभाग स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया। यह सामूहिक प्रयास भारत के वन्यजीव संरक्षण मिशन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

(ब्यूरो रिपोर्ट)

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