Ticker

6/recent/ticker-posts

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में बिना आवश्यक अनुमतियों के तन गया रिसॉर्ट, रसूख के आगे वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश नतमस्तक।



उमरिया:बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में बिना आवश्यक अनुमतियों के तन गया रिसॉर्ट,रसूख के आगे वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश नतमस्तक

उमरिया ।जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एवं बफर इलाके से लगी राजस्व सीमा निर्धारित दूरी तक इको सेंसेटिव जोन में आती है जहां किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण के लिए वाइल्ड लाइफ एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार टाइगर रिजर्व की ईको सेंसेटिव कमेटी से निर्माणकर्ता को अनुमति लेना आवश्यक है,इको सेंसेटिव कमेटी निर्माणकर्ता के आवेदन का परीक्षण सत्यापन करने के बाद अनुमति जारी करती है जिसके बाद ही निर्माण कराया जा सकता है लेकिन टाइगर रिजर्व के पतौर पनपथा परिक्षेत्र के बीच ग्राम मझौली से लगे गांव में मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर तालाब के समीप एक रिसॉर्ट का निर्माण कराया जा रहा है जिसका एक ब्लॉक बनकर तैयार हो चुका है लेकिन यहां के मालिकानों ने टाइगर रिजर्व प्रबंधन से किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं ली और न ही टाइगर रिजर्व प्रबंधन के जिम्मेदार अफसरों ने निर्माण होते देख किसी प्रकार से अवैध रूप से बिना अनुमति के बन रहे रिसॉर्ट को रोकने की जहमत उठाई।

उमरिया:बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में बिना आवश्यक अनुमतियों के तन गया रिसॉर्ट,रसूख के आगे वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश नतमस्तक



सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत,अभी तक नहीं हुआ निराकरण

ग्राम मझौली स्थित इको सेंसेटिव जोन में बिना अनुमति के निर्माण की शिकायत उमरिया निवासी हीरा सिंह के द्वारा सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई जिसके बाद पार्क प्रबंधन हरकत में आया है और निर्माणकर्ता को नोटिस जारी कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए लेकिन निर्माणकर्ता ने रसूख के दम पर काम रोकना तो दूर उसी दरमियान बिजली कनेक्शन और ट्रांसफार्मर और बैठा लिया है हालांकि इसके लिए भी निर्माणकर्ता को अलग से अनुमति पार्क प्रबंधन आवेदन के बाद जारी करता है लेकिन इस मामले में रसूख बड़ा या कानून में से रसूख का रुतबा कानून से ऊपर दिखाई दे रहा है।

उमरिया:बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में बिना आवश्यक अनुमतियों के तन गया रिसॉर्ट,रसूख के आगे वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश नतमस्तक

पहले रिसॉर्ट बनाकर बहा दी उल्टी गंगा।

टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में रिसॉर्ट निर्माण या किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन में एक नियमावली तैयार की गई है जिसके तहत समस्त अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण किया जा सकता है लेकिन ग्राम मझौली के इको सेंसेटिव जोन में बन रहे रिसॉर्ट के संबंध में नियमों की गंगा उल्टी बह रही है पहले रिसॉर्ट बनकर तैयार हो चुका है अब अनुमति के कागज दफ्तर की टेबलों की शोभा बन रहे हैं।

उमरिया:बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के इको सेंसेटिव जोन में बिना आवश्यक अनुमतियों के तन गया रिसॉर्ट,रसूख के आगे वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश नतमस्तक

इको सेंसेटिव जोन में अनुमति प्रदान करने और खारिज करने का अधिकार एल ए सी कमेटी के पास

टाइगर रिजर्व की कोर एवं बफर सीमा से लगे ग्राम मझौली के इको सेंसेटिव जोन में निर्माणाधीन रिसोर्ट की अनुमति के संबंध में टाइगर रिजर्व के संयुक्त संचालक पीके वर्मा ने बताया हैं कि इस मामले में अनुमति प्रदान करने या खारिज करने का अधिकार संभागीय कमिश्नर की अध्यक्षता वाली लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी के पास है,हमारे द्वारा निर्माणकर्ता को नोटिस दिया गया है और राजस्व विभाग को भी सूचना दी गई है,एलएसी की बैठक में इसका निर्माण किया जाएगा।

(ब्यूरो रिपोर्ट)




Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ